Saturday, November 17, 2012


वो जब भी याद आये तो,बस आते चले गए!
दिल और जिगर पे बेइंतहा,छाते चले गए!!

हमने तो बेहद कोशिशें,की मगर ऐ दोस्त!
क्या बताऊँ कि कैसे वो,दिल दुखाते चले गए!!

उफ़ किये बगैर ही,हरेक जुल्म सह लिया!
बेफिक्र हो कर बस वो, मुझको जलाते चले गए!!

मंजर-ऐ-आलम ये था कि सहना था दुस्सवार!
पर उनकी फितरत का क्या,जो कतराते चले गए!!

हमने ना जाने कौन सा,है भूल कर दिया!
जिसकी सजा हम, उम्र भर उठाते चले गए!!

मिलती है बामुश्किले,जन्नत की पेशकश!
हम बार-बार उसको भी,ठुकराते चले गए!!

---राजीव रंजन मिश्रा
  ०९.१०.२०११


परम प्रभु
नटवर नागर 
कृष्ण-कन्हैया
गोपाला नंदलाला
हे गोवर्धनधारी !!

सुनु विनय   
आब कृष्ण मुरारी
राधारमण 
हे यशोदानंदन
गोपी जन वल्लभ !!

आइ पड़ल  
विपदा में धरनी 
लुटि  मचल  
अन्हार अछि भारी
आबू कुंजबिहारी !!

छी आस अहीं 
विस्वास अहीं पर 
लागल अछि 
हे करूणासागर  
हे बिपिनबिहारी !!

यमुना तीरे
खेलय आबु यौ 
भारत देश
बचाबय आबु यौ 
आबू वंशीधर यौ !!

देर नै करु 
देव हमर 
प्रभु दीनदयाला 
किछु त करु 
भक्तक राखू  लाज 
हे गरीबनिवाज !!

हे राधावर 
हे मनमोहन जू 
मुरलीधर 
वंशी कनी बजा दी
हम दीन पुकारी !!

राजीव रंजन मिश्र 

किछु हाइकू सावन आ बरषा पर:

बुन्न बसात
गाछ विरिक्ष बिन
जिवन सुन्न !!

सावन मास 
छायल हरियाली 
पानि परिते !!

मेघ बरसै
लहलहैल गाछ 
भीजल बाट !! 


गाछ पातक
हरियैल रंगत 
बुन्न परैत !!

बाट आ बृक्ष 
पाबि मेघक स्नेह 
विह्वल भेल !!

सुधाए बुन्न 
गाछ-विरिछ लेल
मोन रभसे !!

खिलैत फूल 
इतराइत पात
सौजन मेघ !!

मेघक बुन्नी 
गाछ-वृक्ष आ बाट
आंखि-मिचौली !!

सावन मास
मनसिज सरिस
सुलगे मोन !!

निविल मेघ
सौदामिनी चमकै
माहि-मंडित !!

निशि-वासर
झहरैत बरषा
भासल गाम !!

राजीव रंजन मिश्र
१०.०७.२०१२

भ्रूण-हत्या  

माय देवी छी
सृष्टक रचयता
मानथि सब !! 

बहिन पर 
अप्पन नै कोनो सक 
जिम्मेदारी छी !!

कनियाँ चाही 
जग-सुन्नरिये टा 
सबके चाह !!

संतान रुपे 
बस बेटे टा चाही 
बेटी समस्या !!

गर्भ-धारण 
करबा परिक्षण 
इच्छित नेन्ना !!

पबैत रही 
मनोवांछित फल
प्रवृति दोष !!

बेटी क मारि
सुपुत्र जन्मायब
वंश बढत !!

बेटाक लेल 
कनियाँ कोना लैब 
भावी समस्या !!

रोकी तत्क्षण 
कन्या भ्रूण-हत्या यौ
दृढ विचारि !!

राजीव रंजन मिश्र
१५.०७.२०१२ 

एक टा मैथिल बालक के भगवान राम- जानकी सँ अपना भावी जीवन के  लेल विनय :

हे राम सिया  
वरदान दियह 
बस  हमरा
अग्यान नहिं  घेरै
सत टा के बखानी !!

हम बालक
जन्महिं सँ निश्छल
ऊँच -नीच के
ग्यान नहिं हमरा
जाति-पांति नै मानी !!

अप्पन लोक 
कि आन होय क्यौ  
सबके संग 
रही प्रेम भाव स 
भेद-भाव नै जानी !!

नेन्नापन सँ
रही हम निड्डर 
बनी तेजस्वी 
कायरता छोङि क
करी सैह जे ठानी !!

बात-विचार
भीष्म सरिस हौक
दृढ प्रतिग्य
रही भ सदिखन
विदुर सन ग्यानी !!

बुद्धि विवेक
मेहनत स पाबी
जतबा हम 
ततबे मे निमही
छिनि-छानि नै आनी !!

सबस बेसी 
मनुक्ख बनि जीवी 
मान-मर्यादा 
वहन करी नित
सबके सम मानी !!

सुजस करी 
सौंसे जग भरि में
माय-बापक 
फलथि -फुलैथ माँ
मिथिले  महरानी !!

राजीव रंजन मिश्र
१८.०७.२०१२


नदी 

नदी कहाय 
जतय स निकली 
सबके  पाप 
धोबैत खंघारैत 
बटोरैत संताप !!

होई पहाड़ 
बा पठानी धरती 
कि समतल 
कलकल करैत 
निष्छल बहैत छी !!

हिमखंड स
निकलि हम आबी 
आदर्श रुपे 
सबके जूड़बैत 
समार्जन करैत !!

सूरज के दी 
समुचित रूप सँ 
जमाबय ला
खुब बरसाबय
धरती हूलसय  !!

खेत-पथार
हमरे स सींचाय 
उपजाबय 
त मनुक्ख खाइथ 
हमरा घिनाबैथ !!

दुःख हमर
क्यउ नहि बुझय
घकघोरि क 
करेज जरबय 
प्रदूषित करय !!

याह बुझाय
आब नै थिक मान
लगय जेना 
बाँचब  नहि आब 
सुखैल जाइत छी !!

राजीब रंजन मिश्र 
१४.०७.२०१२



रंज-ओ गम के अफसाने ये,चाक जिगर के कर जाते हैं!
हंसी कहाँ मिलती होठों पर जख्म दिनो दिन गहराते हैं !

बस एक हंसी के खातिर उनके जाने कितने कुर्बान हुए
बेदर्द ज़माने की ठोकर खाकर अब तो हँस कर भरमाते हैं !

कोई तड़पता है हंसने को और कोई तड़पाये आप हँसी को
जाने आप तड़प कर तड़पाने में लोग भला क्या पाते हैं !

बात चली जब जब गुलशन में खिलते कलियों के रंगत की तो
झूम उठा हर ब्याकुल मन जैसे सात सुरों के सरगम लहराते हैं !

पाक इरादे रखना "राजीव" और निगाहें बस मंजिल पर
औरों का गम बांटने वाले हर वक्त यहाँ मुस्काते हैं !


राजीव रंजन मिश्र