Wednesday, March 13, 2013


गजल-३९ 

हम बात बिचारक मारल छी 
थकि हारि सिनेहक डाहल छी 

जत पाठ पढ़ल तत बूझल टा 
मति मोन मिजाजक हारल छी  

ने ज्ञान भगति ने गुण कनिको 
बस लाज लेहाजक छारल छी

ने चालि चलल ने बूझल हम 
सरकार विवेकक डाढल छी 

"राजीव" कहब हम ककरा की 
निज कैल करैलक दागल छी 

२२१  १२२  २२२ 
@ राजीव रंजन मिश्र 

Tuesday, March 12, 2013

गजल-३८ 

हारल के आ जीतल के
माथक टेटर देखल के

मारल करमक अपने सभ
दोसरके दुख बूझल के

टेमी बारल बातक टा
करमक डिबिया लेसल के

साती मोनक टभकै बड
लचरल घरके डेबल के

"राजीव"क ई अवधारल
सतपथ धेने डूबल के 

222 2222
@ राजीव रंजन मिश्र 

Monday, March 11, 2013


गजल-३७ 

की सूतब की जागब हम
जे सोचब से पायब हम 

जे भेटत से भोगब तनि 
नीकक टा गुण गायब हम

अनका पर ने थोपब सभ
अपनाके नित झारब हम 


जौँ सोचल सत मोने नित 
तौँ कौखन ने हारब हम 

"राजीव"क सक लीखब धरि
घोंकब ने बस लारब हम

२२२   २२२२
@ राजीव रंजन मिश्र   

Friday, March 8, 2013

अंतरराष्ट्रीय नारी दिवसक अवसर पर  सभ गोटेकँ  हार्दिक शुभकामनाक संग परसि रहल छी अपन ई गजल : 

गजल-३६ 

हे नारि उठू हुंकार भरू
सहियारि चलू ललकारि चलू

छी मान अँही अभिमान अँही
हहरल हियके परतारि कहू


नित नाम रहै जनमानस मे
करतबकँ छड़ी तलवार धरू


बदलत जगती सहजे नइ ई
जगतारनि बनि पुनि ठाढ़ करू 


ने लाज ढहै अहलाद रहै
सुनगाकँ कनी चिनगारि चलू


ने काज चलत खटराससँ हे
अवधारि दियरि नित बारि बढ़ू 


"राजीव" सुनू हे माय धिया
जगमे नब तेजक संग बहू 


22112 221 12

@ राजीव रंजन मिश्र 






Tuesday, March 5, 2013




भक्ति गजल-३ 

कुंडल कानन दमकैत माधबकँ
अधरन बाँसुरि बिहुँसैत माधबकँ

चानन माथक गमकैत माधबकँ
पैरक पैजनि छनकैत माधबकँ

डाँरक डरकस ससरैत माधबकँ
माय यशोदा सजबैत माधबकँ

कारी नैनन मटकैत माधबकँ
केशक चोटी लटकैत माधबकँ

सुन्नर आनन चमकैत माधबकँ
सुर नर किन्नर निहुँछैत माधबकँ

नागक रनियाँ गुहरैत माधबकँ
ग्वारक धीया नचबैत माधबकँ

ग्वालक संतति बजबैत माधबकँ
शिव चतुरादिक बिनबैत माधबकँ

दाऊ बलदउ खिझबैत माधबकँ
राधा रुक्मणि रभसैत माधबकँ

मंगल गाबिकँ निरखैत माधबकँ
"राजीव"हुँ छथि सुमिरैत माधबकँ

२२२२  २२१  २२१
@ राजीव रंजन मिश्र 

Sunday, March 3, 2013


गजल ३५ 

सोचसँ जीतल ई दुनियाँ 
सोचक हारल ई दुनियाँ

सोच उठौलक आ पटकल 
सोच सवारल ई दुनियाँ

सोचिकँ पैलक सभ सभटा 
सोचक मारल ई दुनियाँ 

सोच बनौलक निक बेजा 
सोच निखारल ई दुनियाँ 

सोचल गौतम तैँ जानू 
अंककँ जानल  दुनियाँ 

सोचक बाबैत राम छला 
कृष्णकँ चिन्हल ई दुनियाँ 

सोचकँ अप्पन शान चढा 
लोक पछारल ई दुनियाँ  

सभ कहथि सोचू जुनि यौ
सोच बिसारल ई दुनियाँ 

सोच छोड़िकँ सभ तरहे 
हाथ पसारल ई दुनियाँ

सोचल बेसी आ करनी 
किछु ने मानल ई दुनियाँ

"राजीव"क बुझने तौँ बस 
सोचक डाहल ई दुनियाँ 

२११ २२ २२२ 
@राजीव रंजन मिश्र 





Saturday, March 2, 2013

गजल-३४

बिनु बातक बात हजार भेटल
सुनि काने कान पसार भेटल


सभ लागल भास नियार मे छल
दिन काजक ने सरकार भेटल


छल सौनक मास दहैल देहरि
अगहन नित पात सचार भेटल


जौँ राखल बात विचार सीटल
घुरि ताकल हाथ लथार भेटल


चुप चापे आँखि निपोरि चिन्हल
अहलादक यार भजार भेटल


छल डाहल मोन मिजाज शोणित
पुनि  लागल हाट बजार भेटल


"राजीव"हुँ हारि हियाउ बैसल
बड शानक माथ कपार भेटल 


22221 121 211

@ राजीव रंजन मिश्र